HIMACHAL’S MONSOON DISASTERS 2023-2024

As monsoon clouds descended over Himachal Pradesh in 2025, widespread destruction followed in their wake. Within days, landslides, READ MORE

🌳अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस पर हिमाचल के वनों का बयान !🌳

  • हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में जहां 2/3 भगौलीक क्षेत्र वन भूमि है वहां का स्थानीय समुदाय अपनी आजीविका के लिए वनों पर निर्भर हैं। कई अध्ययनों मे पाया गया है कि वन के संरक्षण और संवर्धन में वनों पर आश्रित समुदायों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इन्हीं बातों को ध्यान मे रखते हुए भारतीय संसद ने वन अधिकार कानून को 2006 मे पारित किया गया। इसके बावजूद भी पिछले 15 सालों में हिमाचल इस कानून के क्रियान्वयन में अन्य राज्यों से पीछे रहा जहाँ आज तक सिर्फ 169 व्यक्तिगत व सामुदायिक पट्टे दिए गये हैं | राज्य स्तरीय निगरानी समिति (SLMC) कि बैठक कि मिनट्स में कई बार ये निकल कर आया है कि लोगों द्वारा दावे न करने का अहम कारण यही है कि हिमाचल में लोगो के राइट्स सेटल हो चुके हैं | जबकि ज़मीनी स्तर पर कार्यरत सभी संस्था संगठन पिछले कई सालों से वन अधिकार समिति, SDLC व DLC के सभी सदस्यों कि कानून को लेकर ट्रेनिंग कि मांग करते आये हैं क्योंकि उनका मानना है कि लोगों में कानून कि जानकारी का अभाव और कानून से जुड़े मिथ्य ही लोगों द्वारा दावे भरे जाने के बीच सबसे बड़ा रोड़ा है | जो सूचना के अधिकार कानून, 2005 में उपलब्ध जानकारी से स्पष्ट होता है |


सूचना के अधिकार कानून, 2005 से प्राप्त 24 दिसंबर 2021 तक वन अधिकार कानून, 2006 के तहत जनजातीय विभाग द्वारा आयोजित उपमंडल स्तरीय समिति (SDLC) व जिला स्तरीय समिति (DLC) के अधिकारी व गैर अधिकारी सदस्यों के प्रशिक्षण कि जानकारी में निम्नलिखित बाते उभर कर आई हैं :-

1. हिमाचल प्रदेश में वन अधिकार कानून READ MORE