A devastating fire broke out in the Girinagar Gujjar settlement (Parduni Panchayat, Paonta Sahib Tehsil, Sirmaur district). This incident was not merely an accident but a stark revelation of the structural inequalities and policy failures that continue to marginalize the Gujjar community. It is crucial that they receive land rights under the Forest Rights Act to ensure their safety and stability.
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हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला में वन अधिकार कानून 2006, का तीन दिवसीय प्रशिक्षण
वनों पर लोगों के अधिकारों को सुरक्षित करता है वन अधिकार
Shrinking pastoralism, fear of eviction — Forest Rights Act is the only hope for Van Gujjars of Sirmaur
Many families who are still landless cannot even buy land because of the state’s policy
Article written by Himshi Singh
सिरमौर वन अधिकार मंच और चंबा वन अधिकार मंच के कार्यकर्ताओं द्वारा वन अधिकार कानून 2006 के लिए जन जागरण अभियान
सिरमौर वन अधिकार मंच द्वारा चलाई गयी प्रक्रिया के अंतर्गत शिलाई तहसील के कलोग, नाया पंजोर, अज्रोली और जसवी गांव में वन अधिकार कानून, 2006 को समझने व इस कानून के महत्व पर चर्चा करने हेतु बैठकों का आयोजन किया गया। बैठकों में इस कानून में निहित अधिकारों पर चर्चा के साथ दावा फॉर्म भरने की प्रक्रिया, वन अधिकार समिति की जिम्मेदारियों व निष्क्रियता को सुधारने पर बात हुई जिसके अंतर्गत जहाँ ज़रूरी लगता है वहां वन अधिकार समितियों के पुनर्गठन की प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई। इस कानून को समझने के बाद सभी ग्राम वासियों में जल्द से जल्द अपनी ज़मीन और जंगल के लिए दावा फॉर्म भरने व उससे सम्बंधित सरकारी दस्तावेजों को जमा करने कि पहल शुरू हो चुकी है।
गौरतलब है कि वन अधिकार कानून को आये 15 साल हो गये हैं लेकिन अभी तक भी जनता में इस कानून से सम्बंधित जागरूकता का बड़ा अभाव है। जिले से आज तक जितने दावे भरे भी गये हैं उनमे से एक भी जिला स्तरीय समिति (DLC) तक नही पहुंचा हैं और सालों से दावे SDLC के समक्ष लंबित हैं। इसलिए सिरमौर वन अधिकार मंच के सदस्यों द्वारा 22 फरवरी को उप मंडल अधिकारी, शिलाई व असिस्टेंट कमिश्नर सिरमौर से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में लिखित मुख्य मांगों में से (1) FRC नैना से प्राप्त 12 दावों पर 3 बार उप मंडल स्तरीय समिति (SDLC) द्वारा उठाई गयी आपत्तियों के जवाब देने व वन और रेवेन्यू अधिकारियों द्वारा मौके पर पहुँच कर अध्ययन रिपोर्ट SDLC तक पहुचाने के बावजूद निर्णय लंबित, (2) जनजातीय विभाग द्वारा प्रकाशित वन अधिकार कानून पर प्रशिक्षण पुस्तिका को जल्द से जल्द सभी FRCs तक पहुँचाना (3) निष्क्रिय FRCs का पुनर्गठन, (4) FRCs सदस्यों की ट्रेनिंग करवाना। इन सभी मांगो पर दोनों ही जगह सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई।
चंबा वन अधिकार मंच द्वारा चंबा जिला की झुलड्डा, साहो- पद्दर, जडेरा, सराहन, चिलबोंगला पंचायतों व महेला ब्लॉक में वन अधिकार कानून की जानकारी को प्रसारित करने के लिए बैठकें की गयी। साथ ही जिला प्रशासन द्वारा चलाये जा रहे “प्रशासन जनता के द्वार” कार्यक्रम के साथ जुड़ कर पंचायत प्रतिनिधियों एवं वन अधिकार समितियों के सदस्यों के साथ वन अधिकार कानून 2006 के प्रावधानों की जानकारी साझा की गयी।
Fact-Finding report: Dalit Atrocity in Chandni, Sirmaur
Jagiya Ram, resident of Chandni, had purchased 1.9 bighas of land from another general caste member in 2016 and since then had faced harassment by the assaulter family, also residents of the village who were laying their claim on a part of the land. While the dispute was still being heard by the revenue court and a final decision was pending, the general caste claimants on 16th September started erecting a barbed wire fence around the land that they alleged was theirs.
When Jagiya and Santosh went to stop this work, they were attacked violently. Jagiya who was recording the altercation on his phone was brutally attacked as one of the members approached him with a sharp sword like machete – as Jagiya held up his hand to save his upper body, his finger was cut with the sword. Santosh tried to stop the men physically and she was beaten up, her clothes torn, she was ruffled up and then dragged in the field by her hair. The men stopped short when some passers-by shouted out for them to stop.
While Jagiya and Santosh received treatment in the Civil Hospital at Paonta and an FIR has been filed in the matter, the initial FIR did not invoke sections of the Prevention of Atrocities Act. This was done later after pressure by social action groups. Further, while the accused were arrested initially, a cross FIR was filed and they were given bail by the High Court on the 25th of September. Jagiya- Santosh and their family have received police protection – however, the matter remains sensitive and they continue to live in fear and insecurity. The investigation officer is to submit his complete report soon. However, there is a need to highlight this case for several reasons:
- the history of caste discrimination in Sirmaur district, often invisibilised in mountain
रोनाहाट में वन अधिकार कानून पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन प्रेस विज्ञप्ति: रोनाहाट सिरमौर
रोनाहाट में वन अधिकार कानून पर जागरूकता कार्यक्रम
14th Sept 2018 | Independent Fact finding team of Human Rights Defenders and Activists visits Shilai; Demands justice for Jindan
A 7 member team of state and national level human rights defenders, social workers and activists visited
प्रेस विज्ञप्ति: वन अधिकार कानून के अंतर्गत जल्द से जल्द मिलें अधिकार: वन अधिकार मंच, 2 मई 2018
2 मई 2018
शिमला
हिमाचल वन अधिकार मंच के सदस्यों